इस chapter में हम IoT के मूल concepts समझेंगे – Things (Devices), Connections, Controlled Systems, Feedback Loops, TCP/IP vs OSI Models और IoT Application Process Flow। यह IoT की architecture और communication की समझ के लिए बहुत जरूरी है।
Internet of Things (IoT) एक ऐसा network है जिसमें अलग-अलग physical और digital “things” आपस में connected होते हैं और data को collect, share तथा analyze करते हैं। ये “things” sensors, actuators, smart devices या machines हो सकते हैं जो Internet से जुड़े रहते हैं और आपस में communicate करते हैं।
IoT में “Things” उन real-world objects को कहा जाता है जिनमें sensing, communication और processing की क्षमता होती है। ये devices environment से data collect करके उसे cloud या अन्य devices तक भेजते हैं।
IoT में Connections का मतलब devices, gateways, cloud platforms और users के बीच data exchange से है। किसी भी IoT system की performance इन connections की reliability पर निर्भर करती है।
| Connection Type | Description | Example |
|---|---|---|
| Device-to-Device | Direct link between IoT devices | Smart Light ↔ Motion Sensor |
| Device-to-Cloud | Devices connect directly to Cloud | Smart Thermostat → AWS IoT |
| Device-to-Gateway | Intermediate hub forwards data | Smart Hub → Cloud |
| Cloud-to-Cloud | Data exchange between clouds | Google Cloud ↔ IBM Watson |
IoT connections data flow और automation का base हैं। इनसे real-time monitoring, remote control और data-driven decision making possible होती है।
Things और Connections IoT ecosystem की backbone हैं। Efficient connectivity ही automation और smart communication को संभव बनाती है। सही integration से IoT devices बेहतर performance, security और scalability प्रदान करते हैं।
Controlled systems वे systems होते हैं जो किसी feedback mechanism के आधार पर अपने operation को अपने environment या user-defined set values के अनुसार adjust करते हैं। ये systems IoT (Internet of Things) में automation और accuracy के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
Controlled system वह system है जो अपने output को लगातार monitor करता है और प्राप्त feedback के अनुसार input या process को बदल देता है ताकि desired output प्राप्त हो सके।
Controlled systems का basic principle होता है feedback control loop। System अपने output को continuously compare करता है desired set value से और difference (error) के आधार पर corrective action लेता है ताकि output stable रहे।
IoT-based controlled systems modern automation का base हैं। ये systems feedback loop के through self-adjust हो कर desired output provide करते हैं। इसका उपयोग refrigerator, air conditioner से लेकर industrial robots तक हर जगह किया जा रहा है।
Real-time systems वे systems होते हैं जो किसी event या input के आने पर तुरंत response देते हैं। ऐसे systems में feedback loop का प्रयोग किया जाता है ताकि output लगातार monitored और controlled रहे। IoT (Internet of Things) में real-time systems बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये live data के आधार पर तुरंत decision लेते हैं।
Real-time system वह system है जो किसी घटना (event) के घटने के कुछ निश्चित समय (deadline) के भीतर प्रतिक्रिया (response) देता है। यानी system का correctness सिर्फ output पर नहीं बल्कि output के समय (timing) पर भी निर्भर करता है।
Feedback loop एक ऐसा control mechanism है जिसमें system अपने output को continuously monitor करता है और received feedback के आधार पर input या control signal को adjust करता है। इस loop से system stable और accurate output बनाए रखता है।
Real-time feedback systems IoT applications की backbone हैं। ये systems data-driven automation को enable करते हैं और environment के change होने पर तुरंत response देते हैं। Refrigerator, Air Conditioner, Self-driving car आदि इसका बेहतरीन उदाहरण हैं।
IoT (Internet of Things) में devices के बीच communication को समझने के लिए दो मुख्य network models का प्रयोग किया जाता है — OSI (Open Systems Interconnection Model) और TCP/IP (Transmission Control Protocol / Internet Protocol Model)। ये दोनों models यह बताते हैं कि data एक device से दूसरे device तक कैसे भेजा और प्राप्त किया जाता है।
OSI Model एक conceptual framework है जो बताता है कि network communication को सात अलग-अलग layers में कैसे विभाजित किया जाता है। प्रत्येक layer का अपना एक specific function होता है। यह model ISO (International Organization for Standardization) द्वारा develop किया गया था।
TCP/IP Model एक practical model है जो Internet communication को define करता है। इसे OSI model की simplified form भी कहा जा सकता है क्योंकि इसमें केवल 4 layers होती हैं। यह model वास्तव में Internet की working का base है।
| Feature | OSI Model | TCP/IP Model |
|---|---|---|
| No. of Layers | 7 Layers | 4 Layers |
| Developed By | ISO (International Standard) | DoD (Department of Defense, USA) |
| Approach | Theoretical / Reference model | Practical / Implementation model |
| Reliability | Not protocol dependent | Protocol-driven (TCP, IP) |
| Flexibility | Complex but detailed | Simpler and faster |
दोनों models का उद्देश्य समान है — data communication को standard करना। लेकिन OSI model theoretical concept है जबकि TCP/IP model practically Internet और IoT networks में use किया जाता है। OSI की कुछ layers (जैसे Presentation और Session) TCP/IP की Application layer में merge होती हैं।
Connectivity models IoT communication की backbone हैं। OSI model theoretical understanding देता है जबकि TCP/IP model practically communication perform करता है। IoT systems में TCP/IP का उपयोग universal standard के रूप में किया जाता है जिससे devices efficiently data share कर सकें।
Connectivity IoT (Internet of Things) की सबसे महत्वपूर्ण requirement है। IoT devices को आपस में communicate करने के लिए data transmission medium की आवश्यकता होती है। यह medium दो प्रकार का हो सकता है — Wired (तार के माध्यम से) और Wireless (radio signals के माध्यम से)।
Wired connectivity वह system है जिसमें devices को physical cables (जैसे Ethernet, USB, या Serial cables) से जोड़ा जाता है। इसमें signal loss कम होता है और data transmission अधिक secure होता है।
Wireless connectivity में devices radio waves, infrared signals या satellite links के माध्यम से communicate करते हैं। यह IoT का सबसे ज़्यादा उपयोग किया जाने वाला communication तरीका है क्योंकि यह flexibility और scalability प्रदान करता है।
| Feature | Wired Connectivity | Wireless Connectivity |
|---|---|---|
| Mobility | Limited | High (portable devices) |
| Speed | Very High | Moderate to High |
| Reliability | High | Depends on signal quality |
| Security | More secure | Needs encryption and authentication |
| Cost | High setup cost | Low installation cost |
IoT ecosystem में wired और wireless दोनों connectivity का अपना महत्व है। जहाँ wired systems reliability और speed प्रदान करते हैं, वहीं wireless systems flexibility और scalability लाते हैं। एक successful IoT network दोनों तरीकों के smart combination से बनाया जाता है।
IoT Application किसी real-world process को digitally monitor और control करने के लिए बनाई जाती है। इसका working structure एक specific process flow पर आधारित होता है, जहाँ data sensors से लेकर cloud तक जाता है, process होता है और फिर actions के रूप में वापस devices को भेजा जाता है।
IoT application का process flow एक step-by-step sequence होता है जिसमें data का journey define होता है — starting from data sensing to data visualization और control actions तक। यह flow IoT system की efficiency और reliability को तय करता है।
नीचे दिया गया simplified flow दिखाता है कि IoT application में data कैसे travel करता है:
[ Sensors ]
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[ Microcontroller / Gateway ]
↓
[ Network / Internet Connectivity ]
↓
[ Cloud Storage & Processing ]
↓
[ User Dashboard / Mobile App ]
↓
[ Actuators / Devices Action ]
IoT application का process flow data sensing से लेकर action तक का पूरा जीवन चक्र दर्शाता है। एक efficient IoT system वही होता है जिसमें ये सभी steps — sensing, transmission, processing और actuation — seamlessly integrate होकर real-time automation प्रदान करते हैं।
IoT (Internet of Things) का सबसे बड़ा advantage यह है कि यह real-world systems को smart automation में बदल देता है। किसी भी IoT project का process flow समझने के लिए एक real-life example बहुत उपयोगी होता है। यहाँ हम एक Smart Agriculture System का example लेकर IoT working को step-by-step समझेंगे।
Smart Agriculture IoT-based system का उद्देश्य है — soil condition, temperature और humidity को sensors की मदद से monitor करना और automatically irrigation (सिंचाई) control करना। इस system से किसान पानी, ऊर्जा और समय बचा सकता है।
[ Soil Moisture Sensor ] ──► [ Microcontroller (NodeMCU) ]
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[ Wi-Fi Module ] ──► [ Cloud Platform (Thingspeak) ]
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[ Mobile App Dashboard ] ◄── [ Relay + Water Pump ]
Smart Agriculture जैसा IoT-based system यह दर्शाता है कि कैसे sensors, microcontrollers और cloud communication एक साथ मिलकर intelligent automation संभव बनाते हैं। यह process IoT का मूल सिद्धांत है — “Sense → Process → Communicate → Actuate.”